नई दिल्ली: भारत एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक निजी भारतीय विश्वविद्यालय विवादों में घिर गया, जब उस पर एक चीनी कंपनी द्वारा निर्मित रोबोटिक कुत्ते (रोबोडॉग) को अपनी उपलब्धि बताने का आरोप लगा।
यह मामला तब सामने आया जब गैलगोटियास यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने सरकारी चैनल को दिए इंटरव्यू में “ओरियन” नामक रोबोट को विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित बताया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही यूजर्स ने मशीन की पहचान Unitree Go2 के रूप में की, जिसे चीनी कंपनी Unitree Robotics बनाती है।
यह रोबोडॉग बाजार में करीब दो लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है।
🏫 विश्वविद्यालय की सफाई
बुधवार को जारी बयान में विश्वविद्यालय ने कहा कि उसने रोबोट को खुद बनाने का दावा नहीं किया था।
- विश्वविद्यालय ने इसे “प्रोपेगैंडा अभियान” बताया
- कहा कि छात्र वैश्विक रूप से उपलब्ध उपकरणों के जरिए एआई प्रोग्रामिंग सीख रहे हैं
- प्रोफेसर ने भी बयान दिया कि उनकी बात को गलत समझा गया
हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे भ्रामक प्रस्तुति करार दिया।
🔌 स्टॉल पर कार्रवाई?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद के बाद विश्वविद्यालय से समिट में अपना स्टॉल खाली करने को कहा गया।
बाद में खबर आई कि स्टॉल की बिजली आपूर्ति काट दी गई। मौके पर मौजूद पत्रकारों ने बताया कि बूथ की लाइटें बंद थीं और विश्वविद्यालय का कोई स्टाफ नजर नहीं आ रहा था।
🏛️ आयोजकों की प्रतिक्रिया
आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी संबंधित वीडियो साझा किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया।
भारत के आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि यह विवाद समिट में अन्य प्रतिभागियों के कार्यों पर असर नहीं डालना चाहिए और ऐसे आयोजनों में आचार संहिता का पालन जरूरी है।
🌍 एआई समिट की पृष्ठभूमि
भारत एआई इम्पैक्ट समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत मंडपम में किया।
- 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल
- गूगल के सुंदर पिचाई जैसे उद्योग जगत के नेता उपस्थित
- एआई गवर्नेंस, स्टार्टअप्स और इनोवेशन पर चर्चा
हालांकि, उद्घाटन के दिन भीड़ और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन आयोजकों का कहना है कि बाद में व्यवस्थाएं सुधर गईं।
📌 निष्कर्ष
यह विवाद भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में पेश करने की कोशिशों के बीच एक असहज क्षण बन गया है। सोशल मीडिया युग में तकनीकी दावों की तुरंत जांच संभव है, ऐसे में संस्थानों के लिए पारदर्शिता और स्पष्टता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।





