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🇮🇳 भारत की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी ‘PRAHAAR’ जारी, साइबर हमलों और ड्रोन खतरे पर खास फोकस

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सोमवार (23 फरवरी 2026) को देश की पहली व्यापक आतंकवाद-रोधी नीति ‘PRAHAAR’ (National Counter Terrorism Policy and Strategy) जारी की। नई नीति में सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद के साथ-साथ साइबर हमलों, ड्रोन और नई तकनीकों से जुड़े खतरों पर विशेष जोर दिया गया है।

🔎 आतंकवाद को धर्म से नहीं जोड़ता भारत

नीति में स्पष्ट कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी विशेष धर्म, जातीयता, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ता।

हालांकि, इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत लंबे समय से सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद का सामना कर रहा है, जहां आतंकी संगठन और उनके सहयोगी भारत में हमलों की साजिश रचते रहे हैं।

🌐 साइबर हमलों और हैकर्स का बढ़ता खतरा

गृह मंत्रालय ने कहा कि:

  • अपराधी हैकर्स और कुछ राष्ट्र-राज्य भारत पर साइबर हमले कर रहे हैं।
  • आतंकी संगठन सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट का उपयोग कर रहे हैं।
  • ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल आतंक गतिविधियों में किया जा रहा है, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में।

✈️ तीनों मोर्चों पर खतरा: जल, थल और वायु

नीति के अनुसार भारत को जल, थल और वायु तीनों क्षेत्रों में आतंकी खतरों का सामना है।

महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा क्षमता मजबूत की गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • बिजली
  • रेलवे
  • एविएशन
  • बंदरगाह
  • रक्षा
  • अंतरिक्ष
  • परमाणु ऊर्जा

⚠️ CBRNED खतरा भी चिंता का विषय

नीति में चेतावनी दी गई है कि आतंकवादी CBRNED (Chemical, Biological, Radiological, Nuclear, Explosive, Digital) सामग्री तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

इस तरह के हमलों को रोकना आतंक-रोधी एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बताया गया है।

👮 कानूनी प्रक्रिया पर जोर

आतंकवाद से जुड़े मामलों में मजबूत सजा सुनिश्चित करने के लिए नीति में सुझाव दिया गया है कि:

  • FIR दर्ज होने से लेकर अभियोजन तक हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए
  • जांच और सबूत संग्रह को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाए।

🧠 कट्टरपंथ रोकने की रणनीति

नीति में युवाओं के कट्टरपंथीकरण को रोकने पर विशेष ध्यान दिया गया है:

  • संदिग्ध युवाओं की पहचान के बाद ग्रेडेड पुलिस रिस्पॉन्स
  • मध्यमार्गी धार्मिक नेताओं और NGOs की मदद से जागरूकता अभियान
  • जेलों में डीरैडिकलाइजेशन कार्यक्रम
  • सामुदायिक भागीदारी के जरिए शांति और सद्भाव बनाए रखने की पहल

🌍 अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

नीति में कहा गया है कि आतंकवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्रवाई के साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग बेहद जरूरी है, क्योंकि कई आतंकी संगठन विदेशों से संचालित होते हैं और स्थानीय नेटवर्क का उपयोग करते हैं।