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Narendra Modi ने AI समिट के जरिए दिखाया वैश्विक विजन, चुनौतीपूर्ण साल के बाद नई शुरुआत

नई दिल्ली | 17 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित हाई-प्रोफाइल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट के मंच से न केवल भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित कर रहे हैं, बल्कि एक कठिन साल के बाद अपनी राजनीतिक वापसी का भी संदेश दे रहे हैं।

‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ में फ्रांस और ब्राजील सहित एक दर्जन से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों के दिग्गज नेता शामिल हुए। इनमें OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Alphabet (Google) के सुंदर पिचाई और Anthropic के डारियो अमोदेई जैसे नाम शामिल हैं।

🌍 कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूती

पिछले साल मोदी सरकार को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था—

  • पाकिस्तान के साथ सीमा तनाव
  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा
  • भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करने वाले विवाद

लेकिन 2026 की शुरुआत में स्थिति बदली हुई नजर आ रही है।

  • अमेरिका के साथ टैरिफ में राहत
  • यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता
  • कनाडा के साथ संबंध सुधारने की पहल

इन घटनाक्रमों ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को फिर से मजबूत किया है।

🤖 भारत को AI हब बनाने की रणनीति

मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक AI केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

  • अरबपति गौतम अडानी समूह ने 2035 तक 100 अरब डॉलर के निवेश की योजना घोषित की है, जिसमें AI-रेडी डेटा सेंटर शामिल हैं।
  • टेक्नोलॉजी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत अगले दो वर्षों में 200 अरब डॉलर से अधिक का AI निवेश आकर्षित करने की उम्मीद कर रहा है।
  • Amazon और Microsoft जैसी कंपनियों ने भारत में 50 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

भारत की बड़ी टेक-सेवी आबादी और इंजीनियरिंग टैलेंट को AI रेस में बड़ा हथियार माना जा रहा है।

📈 आर्थिक संकेत सकारात्मक

सरकार का अनुमान है कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि 7.2% तक पहुंच सकती है। अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद यह दर और बेहतर हो सकती है।

राजनीतिक रूप से भी मोदी को हाल के राज्य चुनावों में बड़ी जीत मिली, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।

⚠️ AI से जुड़ी चुनौतियां

हालांकि AI अवसरों के साथ जोखिम भी लेकर आया है।

  • Infosys और TCS जैसी IT कंपनियों पर AI के कारण पारंपरिक बिजनेस मॉडल प्रभावित होने की आशंका है।
  • IT सेक्टर के शेयरों में हाल के सप्ताहों में गिरावट देखी गई।
  • हर साल लाखों युवाओं को रोजगार देने की चुनौती सरकार के सामने है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने AI को “राज्य क्षमता की परीक्षा” बताया और रोजगार सृजन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

🌏 ग्लोबल साउथ पर फोकस

विश्लेषकों का मानना है कि मोदी इस समिट के जरिए खुद को “ग्लोबल साउथ” की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों के लिए भारत AI समाधान विकसित कर रहा है—जैसे स्वास्थ्य डायग्नोस्टिक्स, डिजिटल ट्यूटर और कृषि सलाह प्रणाली।

निष्कर्ष

AI समिट प्रधानमंत्री मोदी के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी इवेंट नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और कूटनीतिक दिशा का प्रदर्शन है। एक कठिन वर्ष के बाद यह आयोजन भारत को AI क्रांति के केंद्र में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा का प्रतीक बनकर उभरा है।