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37 साल बाद पूरा हुआ मंझावली यमुना पुल: अब ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद सिर्फ 30 मिनट में

ग्रेटर नोएडा/फरीदाबाद | 17 फरवरी 2026: एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। 37 साल से लंबित मंझावली यमुना पुल परियोजना अब लगभग पूरी हो चुकी है। इसके चालू होते ही ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद की दूरी, जो अभी ट्रैफिक के कारण 2 घंटे तक लगती है, घटकर महज 30 मिनट रह जाएगी।

🚗 अभी कैसी है स्थिति?

फिलहाल ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद जाने के लिए यात्रियों को:

  • नोएडा और दिल्ली के रास्ते से गुजरना पड़ता है
  • कालिंदी कुंज या ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उपयोग करना पड़ता है
  • पीक ऑवर में भारी जाम का सामना करना पड़ता है

सीधी कनेक्टिविटी न होने से रोजाना हजारों लोगों को लंबा और थकाऊ सफर करना पड़ता है।

🌉 मंझावली पुल देगा सीधा रास्ता

यमुना नदी पर बन रहा मंझावली पुल दोनों शहरों को सीधे जोड़ेगा।

  • चार लेन की सड़क तैयार की जा रही है
  • यात्रा समय में भारी कमी
  • बड़े ट्रैफिक जाम से राहत
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार

यह मार्ग ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के बीच आवागमन को आसान बनाएगा।

🕰️ 1989 से चल रही थी योजना

इस पुल का प्रस्ताव पहली बार 1989 में रखा गया था। उस समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट ने इसका शिलान्यास किया था।

हालांकि, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक कारणों से परियोजना वर्षों तक अटकी रही।

  • 2014 में हरियाणा ने अपनी ओर का निर्माण पूरा कर लिया
  • उत्तर प्रदेश की ओर का काम लंबित था
  • अब यूपी सरकार ने निर्माण कार्य तेज किया है

💰 लागत और चुनौतियां

  • परियोजना की अनुमानित लागत: करीब ₹66 करोड़
  • लगभग 70% भूमि अधिग्रहण पूरा
  • शेष भूमि के लिए किसानों से मुआवजा वार्ता जारी

भूमि अधिग्रहण इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती रही है।

📍 एनसीआर को मिलेगा बड़ा फायदा

पुल के चालू होने के बाद:

  • ग्रेटर नोएडा से गुरुग्राम का रास्ता फरीदाबाद होकर आसान होगा
  • नोएडा और गाजियाबाद के बीच बेहतर संपर्क
  • क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा

यह परियोजना एनसीआर में ट्रैफिक दबाव कम करने और बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

📌 निष्कर्ष

करीब चार दशकों के इंतजार के बाद मंझावली पुल एनसीआर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। इसके पूरा होते ही लाखों यात्रियों का समय और ईंधन दोनों की बचत होगी, साथ ही क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।