नई दिल्ली | 18 फरवरी 2026: भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी Hasin Jahan ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर घरेलू हिंसा (DV Act) और भरण-पोषण से जुड़े मामलों को कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन शामिल थे, ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।
⚖️ क्या है मामला?
- हसीन जहां और मोहम्मद शमी का निकाह 7 अप्रैल 2014 को इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था।
- 17 जुलाई 2015 को उनकी एक बेटी का जन्म हुआ।
- वर्ष 2018 में हसीन जहां ने घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत शिकायत दर्ज की।
उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
इसके बाद जादवपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की विभिन्न धाराओं (498A, 328, 307, 376, 325 और 34) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
💰 भरण-पोषण विवाद
हसीन जहां ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की मांग भी की थी।
- 2019 में अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शमी और उनके परिजनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
- बाद में सेशंस कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी, जो करीब चार साल तक प्रभावी रही।
- 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सेशंस कोर्ट को वारंट से जुड़े मामलों का निपटारा एक महीने में करने का निर्देश दिया।
पिछले वर्ष कलकत्ता हाईकोर्ट ने शमी को अंतरिम भरण-पोषण के तौर पर पत्नी और बेटी को 4 लाख रुपये प्रति माह देने का आदेश दिया था।
हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी मांग की है कि इस राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति माह किया जाए।
🏛️ दिल्ली ट्रांसफर की मांग क्यों?
याचिका में कहा गया है कि:
- हसीन जहां अब दिल्ली में रह रही हैं।
- बेटी की बेहतर परवरिश और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए मामलों को दिल्ली ट्रांसफर किया जाए।
- शमी का परिवार उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहता है, ऐसे में दिल्ली दोनों पक्षों के लिए सुविधाजनक होगी।
- शमी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, इसलिए दिल्ली में मुकदमा लड़ने में उन्हें कठिनाई नहीं होगी।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उनके पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है और वे अकेले बेटी की देखभाल कर रही हैं।
📌 आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले पर अगली सुनवाई में विस्तृत बहस होगी। अदालत यह तय करेगी कि मामलों को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया जाए या नहीं।





